खुदा गवाह है कि अब काटे से नहीं कटती,
यह इन्तिजार की रातें, ये इन्तिजार के दिन।
-जोश मलीहाबादी
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खुदा जाने मुहब्बत कौन-सी मंजिल को कहते हैं,
न जिसकी इब्तिदा ही है न जिसकी इन्तिहा ही है।
-जिगर मुरादाबादी
1.इब्तिदा- आरम्भ, शुरूआत
2.इन्तिहा-
पराकाष्ठा, आखिरी हद, चरमसीमा
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खुदा जाने तुमने किस अन्दाजे-नजर से देखा है
कि मुझको जिन्दगी अब जिन्दगी मालूम होती है।
-कैफी चिड़िया कोटी
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खुदाया जज्बए-दिल क़ी मगर तासीर उल्टी है
कि जितना खींचता हूँ और खिंचता जाये हैं मुझसे।
-मिर्जा गालिब
1.खुदाया - हे खुदा 2.जज्बए-दिल
- दिल की कशिश
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